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जानें सिम स्वैपिंग के बारे में सब कुछ अकाउंट से निकल जाते हैं पैसे पर खाताधारक को पता नहीं चलता

एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। वहीं, हैकर डिजिटल भुगतान की खामियों का फायदा उठाकर नए-नए तरीकों से लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा रहे हैं।

नोएडा में प्रतिदिन इस तरह के औसतन चार-पांच मामले सामने आते हैं। हैकर खातों में सेंध लगाने के लिए अब तेजी से सिम स्वैपिंग का तरीका अपना रहे हैं।

सिम स्वैपिंग के जरिए हैकर आपकी पहचान चोरी कर, बैंक खाते से जुड़ा आपका मोबाइल नंबर बंद कराते हैं और फिर फर्जी पहचान पत्र के जरिये उसी मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम अपने पास एक्टिवेट (शुरू) करा लेते हैं।

सिम स्वैपिंग के लिए हैकर अब एक नया तरीका भी अपनाने लगे हैं। हैकर अपने शिकार को फोन कर उनके सिम को अपग्रेड करने या उसकी वैधता बढ़ाने का झांसा देते हैं।

इसके बाद पीड़ित से कहा जाता है कि वह सिम कार्ड पर लिखा 20 अंकों का नंबर अपने कस्टमर केयर के नंबर 121 पर एसएमएस कर दें। हैकर के पास पहले से पीड़ित का नया डुप्लीकेट 4जी या 3जी सिम रहता है।

ये सिम फर्जी पहचान पत्र की मदद से प्राप्त किया गया होता है। पीड़ित जैसे ही 121 पर सिम का नंबर मैसेज करता है। कुछ देर में उसके पास मौजूद सिम बंद हो जाता है और हैकर के पास मौजूद डुप्लीकेट सिम शुरू हो जाता है।

क्यों करते हैं सिम स्वैपिंग?

आपका सिम हैकर के पास शुरू होने के बाद वह आपके इंटरनेट बैंकिंग पर लॉग इन करता है। जाहिर है उसके पास पासवर्ड नहीं होता है, जिसे वह रीसेट करता है। नया पासवर्ड रीसेट करने के लिए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है। सिम हैकर के पास होने के कारण उसे आसानी से ओटीपी मिल जाता है और हैकर इंटरनेट बैंकिंग के जरिये आसानी से आपके खाते में सेंध लगा सकता है।

पीड़ित को इसका पता भी नहीं चलेगा, क्योंकि बैंक का एसएमएस अलर्ट भी हैकर के पास मौजूद सिम कार्ड पर ही पहुंचेगा। सिम स्वैपिंग से बचाने के लिए पिछले दिनों सभी टेलिकॉम कंपनियों ने अपने ग्राहकों को एसएमएस भेजकर जागरूक करने का प्रयास किया है कि वह अपने सिम का 20 डिजिट का नंबर 121 पर एसएमएस न करें।

In English :

What exactly is SIM swap?

(SIM swap is a type of phishing fraud that poses a serious threat to customer and bank security. The fraudster obtains an individual’s banking details through phishing techniques or by purchasing these from organised crime networks. They then use this information, including personal details sourced via social media, to pose as the victim to the mobile network operator and fool them into cancelling and reactivating the victim’s mobile number to a SIM in their possession. As a result, all calls and texts to the victim’s number are routed to the fraudster’s phone, including one-time passwords for banking transactions. After receiving a one-time pin or password from a bank, the fraudster can then potentially access the customer’s bank account and transfer funds.)

कैसे मिल जाता है डुप्लीकेट सिम?

पीड़ितों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि हैकरों को उनका डुप्लीकेट सिम कैसे मिल जाता है। साइबर क्राइम विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल ने बताया कि हैकर अक्सर सोशल मीडिया के जरिये आपकी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद उस जानकारी के आधार पर एक फर्जी पहचान पत्र तैयार किया जाता है, जिसकी मदद से डुप्लीकेट सिम जारी करा लिया जाता है।

अमूमन सिम कार्ड देने से पहले टेलिकॉम कंपनियों के स्टोर पर आवेदक और दस्तावेज का अच्छे से मिलान नहीं किया जाता है। कई बार टेलिकॉम कंपनी के स्टोर पर कार्यरत किसी कर्मी की मदद से भी हैकरों को डुप्लीकेट सिम मिल जाता है।

कैसे मिलता है बैंक खाते का ब्योरा?

साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार नोटबंदी के बाद देश में ई-पेमेंट और ई-शॉपिंग का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके लिए बहुत से मोबाइल एप और गेटवे आदि बने हैं। जब भी हम कोई ई-पेमेंट करते हैं तो हमारी गोपनीय जानकारियां संबंधित वेबसाइट और उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे गेटवे के पास पहुंच जाती है।

ऐसे में कई जगहों से हमारी गोपनीय जानकारी चोरी हैकरों तक पहुंच सकती है। कई ऐसे भी मामले भी आ चुके हैं, जिसमें बैंक कर्मियों द्वारा अपने ग्राहकों का गोपनीय डाटा बेचा गया हो।

ये है सिम स्वैपिंग से बचने के तरीके

  • सोशल मीडिया पर अपनी गोपनीय जानकारी या पूरा ब्योरा साझा न करें जैसे कि घर का पूरा पता।
  • सोशल मीडिया संबंधी सभी सिक्योरिटी फीचर हमेशा ऑन रखें ताकि वही लोग आपकी जानकारी देख सकें, जिन्हें आप चाहते      हैं। अनजान लोगों को न जोड़ें।
  • सोशल मीडिया अथवा ईमेल पर अनजान लोगों द्वारा भेजा गया मैसेज या ईमेल न खोलें। इसमें वायरस हो सकता है जो आपकी      सभी जानकारी हैकर तक पहुंचा सकती है।
  • अगर मोबाइल बैंकिंग करते हैं तो भरोसेमंद मोबाइल ऐप ही डाउनलोड करें।
  • भरोसेमंद ई-वॉलेट का इस्तेमाल करें और ई-वॉलेट में जरूरत भर सीमित रकम ही रखें।
  • भरोसेमंद वेबसाइट पर ही ई-शॉपिंग करें।
  • अपना मोबाइल अनजान व्यक्ति के हाथ न लगने दें। मोबाइल को पासवर्ड लगाकर सुरक्षित रख सकते हैं।
  • फोन या ईमेल पर किसी को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या क्रेडिट कार्ड से संबंधित कोई जानकारी न दें। बैंक के पास          आपके पासवर्ड या पिन के अलावा सारी जानकारी पहले से होती है।
  • घर की महिलाओं व बुजुर्गों को भी इस संबंध में जागरूक करें। हैकर उनसे आसानी से गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।
  • आधार कार्ड का नंबर अनजान मोबाइल नंबर पर एसएमएस न करें। बैंक में जाकर खुद आधार कार्ड पंजीकृत कराएं।
  • धोखाधड़ी का पता चलते ही बैंक को सूचना दें। कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग आदि ब्लॉक करा दें या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड        बदल दें। बैंक से की गई शिकायत का नंबर व एसएमएस सुरक्षित रखें।
  • पुलिस को सूचित करें, पुलिस की साइबर क्राइम सेल को तत्काल सूचित करें। जितनी जल्दी साइबर सेल को सूचना मिलेगी,        खाते से निकाली गई रकम वापस मिलने की उम्मीद उतनी ज्यादा रहेगी।
  • 30 दिन में बैंक से जरूरी सहायता नहीं मिलने पर बैंकिंग लोकपाल या बैंक के प्रशासनिक शिकायत जांच अधिकारी से संपर्क      करें। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर को भी शिकायत भेज सकते हैं।

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